हिन्दी
प्रभु के नाम से हम
मिलने के वेलावों मे
दिल से मनन करेंगे
उसके अनुग्रह दिन प्रतिदिन
पहाड़ हटजाने पर
महान चट्टान दूर होने पर
उसकी दया सदा स्थिर रहेगा
उसके संतानों का आसरा
प्रभु के आगमान मे
दुल्हन हमको वो लेजाएगा
मेरे आसूवों को पोंछेगा
उसके बाहों मे अपनाएगा
Translation of
Daivathin namathil (517)