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प्रभु कि स्तुति हो (३)
आज और सर्वदा मेरे ...
कलवरी के क्रूस पर मेरे लिए मरा
रक्षक कि स्तुति हो
आज और सर्वदा
पापों के भोजों से मुझे छुड़ा लिया
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
शत्रुवों के बीच मे मेझ को बिछाता
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
असुवों गिरने पर दया दर्शाता
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
अनुग्रह से मुझे आज तक संभाला
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
दृष्टि मुझपर रक्कर आगे को चलाता
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
बीमारी के वक्त मे साथ रेनेवाला
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
आत्मा के शक्ति को मुझमे उंडेल दाता
प्रभु कि स्तुति हो
आज और सर्वदा मेरे
Translation of
Daivathinu sthothram - innumenekum (538)