Prabhu mera hath – Sadhuvenne

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प्रभु मेरा हाथ न छोड़ेगा अंत तक वो लेचलाएगा अंतिम क्षण तक पंखों तले संभालेगा वो जग में आपत्ति में बीमारी में येशु ही मेरा आसरा आसुवो के तराई में रोने की कड़ी वक्त में हाथ न छोड़ेगा साथ रहेगा असुवों सारे पोचेगा घोर आंधी और लहरों नय्यर पर आक्षेप करने वक्त उस घड़ी में खरीब मेरे प्रभु है भला सर्वदा स्वर्ग में भवन बनाकर जल्दी आयेगा प्रियतम सेवा पूरी करके मुझे पहुंचना है मुझे अपना घर