Predhwi ki is thodi aayu - Paril parkkum alpayussil

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पृथ्वी की इस थोडी आयु में बोझें ज़्यादा अब नहीं उस काले कीलों से जड़ा वह बोझ हमारे ले लेगा मैं अपने पाँवों को रखूँगा न हटने का चट्टान पर मेरे लिए टूटा चट्टान पर मेरे लिए टूटा चट्टान पर बड़ी लहरें गरजती तब छोड़कर किनारे से दूर मैं अकेले मैं अपने नाव पर आशा विहीन सोच में तेरे साथ हूँ बोल कर बोली मैं सुनूँगा प्रिय से बोली मैं सुनूँगा अपने प्रिय से बोली मैं सुनूँगा अपने प्रिय से रोग दुख व्याधि जो बडे समय व्याकुल होते समय पर क्रूस पर दुख सहा वही येशु ही केवल आसरा सीने से लगाऊँगा दलदल की कीच से उबारूँगा कानों में तसल्ली सुनाऊँगा कानों में तसल्ली सुनाऊँगा शरीर मिट्टी में छोड़कर आत्मा प्रिय के साथ में आकाश गंगायें पार कर प्रिय ही सहारा इस सफर में देखूँगा मैं उस पार को मोल लिए हुओं की भीड़ को मुझे ताकती भीड़ को मुझे ताकती भीड़ को ऑखों न देखा वह किनारा आनंदों के किनारें दुल्हन की समान सजे हुए तेज से भरा नया यरूशलेम मेरा ही होते वक्त में चूम लूँ मैं पैर येशु के वीणाओं से मैं गीत गाऊँगा वीणाओं से मैं गीत गाऊँगा