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प्रेमी मसीह के प्रेम बराबर
प्रेमी है कोई नहीं
प्रेम बना वह मुजस्सम
प्रेम से जान दी अपनी
प्रेम से दी है तसल्ली
प्रेम नगर में विराजा
प्रेमी मसीह के प्रेम के लिए
दिल में जगह है नहीं
प्रेम के जो हैं बैरी
प्रेम से आँख चुरानी
कब लग दूर रहेगा
सुन्दर समय खोयेगा
होवे कैसा पापी ऐ भाई
प्रेम वह करता तुझे
पाप का भार तू लाकर
चरणों में शीश नवा दे
मुक्तिदाता है यीशु
सच है बचाता यीशु
गफ़लत में क्यों भूला फिरे है
मुक्ति से ऐसी बड़ी
आज है दिन मुक्ति का
अनुभव करले तू उसका
देन ख़ुदा की यही है
आ इसे तू अपना ले
संकट में वह साथ भी देता
मित्र है सच्चा वही
दुःख में वही सम्भाले
जब कोई काम न आवे
यीशु ही मुझको सुहावे
और कोई याद न आवे
उसके प्रेम का हूं मैं पुजारी
भक्ति है सच्ची यही
क्रूस का प्रेम लुभावे
दुनियां मुझे न भावे
पीछे मैं उसके चलूंगा
बेड़ा पार लगावे