Rooh ki aag ko Maango

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रूह की आग को मांगो हाथ उठाओ सारे रूह की कुदरत रूह की बारिश हो जाएगी प्यारे रूह की आग से जल जाएगी शैतान्न की सब चालें बंद दरवाज़े खोल देगा तोड़ के सारे ताले ईमान की डूबती नईया लो पल भर में है तारे पाक कलाम से मौजजे होंगे सब दुःख टल जायेंगे जीवन रोशन हो जाएगा अन्ध्यारे ढल जायेंगे तु सची राह अपनाले रूह ज़िन्दगी तेरी सवरे खुद ही बरकत पाने का मुह को अपने खोलो अपने गुनाह से तौबा करलो रूह के पीछे हो लो दिलो को खाली करदो रूह तुझमें समाना चाहे