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शून्य से लेकर मुझे
उठाया तू प्रभु
प्रेम जब स्मरण करु
आनंद से गावूंगा
तू मुझे प्रेम करने
क्या है मुझमें प्रभु
तू मुझे याद करने
मेरा घराना क्या
पीढ़ी से पीढ़ी तक
ख्याल करनेवाला तू
प्रेम की गहराई
वर्णन से है अपार
दुखों के वक्त में
अश्वासक तू बना
भोजो के समय में
छावनी तू बना