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सृष्टि है तेरी कविता,
गाती है सन्ना तेरी
सारी धरा पर गूँजती है,
निस दिन महिमा तेरी
झरने की कल कल भी,
करती है तेरी महिमा
पक्षी भी गाते है,
तू है कितना महान
वन के सुमन भी है हंसते,
करते है जय जय कार
नभ की नीलिमां से तारे,
धरती को करते इशारे
सागर की चंचल मौजे,
देती हैं तेरी ही यादें
ऊँचे शिखर भी हैं कहते,
तेरी कला है अपार
दाऊद के गीतों में है,
तेरी प्रशंसा की धारा
जन्नत में कहते फरिश्ते,
कर्ता है तू ही हमारा
सृष्टि के हर एक कण में,
निखरा है तेरा प्यार