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संग हम तुम्हारे चलते रहेंगे,
ऐ मेरे प्यारे मसीहा
तू ना होता तो मुझ पापी को
देता कौन सहारा
ये आकाश, ये पृथ्वी, ये पर्वत,
ये सागर, ये गाते रहेंगे
मेरे मसीहा के भजन सुनाते रहेंगे
तू ना होता तो मुझ पापी को
देता कौन सहारा
मृत्यु के डंक से, है आ कर के तू ने,
हम को बचाया
शैतान के बन्धन से तू ने,
हम को छुड़ाया
तू ना होता तो मुझ पापी को
देता कौन सहारा
हो धन्य तेरा, दिल से हमेशा,
मेरे खुदाया
ईश्वर से, मानव का, तूने मेल कराया
तू ना होता तो मुझ पापी को
देता कौन सहारा