Swarg ke pitha theri sidh - Swargeeya pithave (2756)

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स्वर्ग के पिता तेरी सिद्ध इच्छा को स्वर्ग जैसे पृथ्वी पर बी होने दो तेरे इच्छा किया तेरे संतान जैसे आज में आता हु तेरी इच्छा करने को है प्रभू तेरी इच्छा करने को आता हु में अब पूरे दिल से मेरे इच्छा बिलकुल ना होने पाए तेरी इच्छा मुझमें पूरी होजाए पवित्र सुहावनी तेरी इच्छा को बली भांति समजू उसपर चलू में मन को मेरा नया कर्ता हू निरन्तर तुझ से ही केवल मेरा मोहब्बत उसके हतेली में हु में सुरक्षित है ना कोई मेरा विरोध करने आज मेरे सामने आता हर मुसीबत तेरी इच्छा है में समझ जाता हू मसीह येशु के बलिदान के खातिर उसके इच्छा से में शुद्ध हो गया उसके इच्छा पूरी करके पाऊं इनाम धीरज मुझमें देना मेरे प्रभुजी मेरे सिर के हर एक बालों को बी तू घोर से गिनती करके जानता है उसे उसमे से एक बाल बी नीचे गिरना है तो तेरी इच्छा से ही होता है पूरा किसी को नही मालूम होता भोजन भोजन करके सदा जीवित रहूंगा मेरे खुदावंद के इच्छा पूरी करके सेवा पूरी करना है मेरा भोजन मेरे कष्टों को को प्रभु देता है करता हु अर्पण में अपना जीवन को मुझे तोड़ने की यदि तेरी इच्छा हो तो तेरी इच्छा मुझमें पूरी होने दो