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तेरे बिन प्रभु मैं कुछ भी नही
बह रहा हूँ मैं सागर में कहीं
तेरा साथ हैं तो कर जाऊँ पार
हर तूफ़ानी रात और उँचा पहाड़
पुंजता रहा हर मूरत को मैं
चूमता रहा हर पत्थर को मैं
ये ना जाना ज़िंदा हो तुम पिता
मेरे ही लियें तू सूली चढ़ा
अब मुड़कर कभी ना मैं देखूँगा
अर्पण तुझे मेरा जीवन सदा सर्वदा
तेरे बिन प्रभु…
देखा जब मैने तेरी आँखो में
गूँज उठे ये बोल मेरे कानो में
डर ना जाना मैं तेरे साथ हूँ
भीड़ में अगर अकेला हैं तू
अब मुड़कर कभी…