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तू जो छू जाए इस मट्टी को
ये मट्टी कुंदन हो जाए
कुम्हार बने जिस बर्तन का
वो बर्तन दर्पण हो जाए यीशु यीशु
तूफानों की हस्ती है क्या
जब जिंदा चट्टान पे हो आंखें
अंगूर के पेड़ से पेवस्ता
हर डाली सावन हो जाए
दुनिया छोड़े छोड़े साथी
मिट्टी का खिलौना है इंसान
गर हाथ में हाथ हो येशु का
तो मौत भी जीवन हो जाए