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योग्य तू है, योग्य मेरी समझ से परे
अंदाज़ा नहीं मुझे तेरी महिमा कैसी है
मै न बतलाता पाँउ कितना गहरा तेरा प्रेम
कानों ने सुना था प्रभू
अब देखा आँखों से
तू योग्य .. ३
तू है योग्य स्तुति के
हमेशा के लिए
महिमा दू मैं उसे जिसने बचाया मुझको
तूने खोजा और छुड़ाया
मेरी शरम से मुझको
बेबायाँ है करुणा अपर तेरा प्रेम
कानों ने सुना था प्रभु
अब देखा आँखों से
करे प्रशंसा गाये स्तुति गीत
करे प्रशंसा तेरे नाम की