Tum Jagat Ki Jyoti Ho

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तुम जगत की ज्योति हो तुम धरा के नमक भी हो तुम को पैदा इसलिए किया तुमको जीवन इसलिए मिला उसकी मर्जी कर सको सदा वो नगर जो बसे शिखर पर छिपता ही नहीं किसी की नजर तुम्हारे भले काम चमके इस तरह पड़ोसी से प्रेम तुमने सुनना है दुश्मनों से प्रेम मेरा कहना है तभी तुम संतान परमेश्वर समान आंख के बदले आंख बुराई का सामना हो फेरो दूसरा गाल सह लो सब अन्याय ऐसा ही जीवन पिता को भाता है