हिन्दी
विजय की आवाज सुनता हु
हल्लेलुया हल्लेलुया
महिमा का राजा आ रहा है
कटनी का दाता है वो
जायेंगे हम खेत में
कटनी को हम करेंगे
जीते हम इस दुनिया से बी
मूल्यवान आत्माओं को
अंधकार से बरा जगत में
है नही ज्यादा दिन
ज्योति को हमें फैलाने
मुझे भी तू भेजना
किसको में अब भेजूंगा
कोन अब जायेगा
प्रेमी पिता का कोमल ध्वनि
सुनता हु खानो में
दिन प्रतिदिन नरक की और
जाता है हजारों लोग
प्रेमी पिता के प्रेम को
ना जानकर नाश होते
जीवन के अंत में पोछूंगा
तेरे चरणों मे
खाली हाथ से रहने को
ऐसा ना होने पाए
Translation of
Aarppin nadam uyarunnitha (117)