Adbhut Hath Jo Chalaya Mujhe Kabhi Na Huyi

हिन्दी

अद्भुत हाथ जो, चलाया मुझे, कभी न हुई, कोई घटी ।(२) मेरी आवाज़ सुनता एक, स्त्रोत है मेरा, कभी भी धीमा न होगा ।(२) हल्ले हल्लेलूय्याह गाऊँगा मैं, वो भुजबल से चलाया मुझे हल्ले हल्लेलूय्याह गाऊँ सदा, वो मधुरतम स्वर ने अगुवाई की ।(२) हर दिन भरता प्रभु , मेरे प्याला को, अभी तक उसमें, कोई घटी न हुई ।(२) जीवनदायिनी नदी, मेरे प्यास बुझाने को, वो कभी भी सूखेगा नहीं ।(२) मुझे ढाढस बांधने, एक शरणस्थान है, वो द्वार कभी बंद न होगा ।(२) अपने सिरस टिकाने, एक वक्ष है पास मेरे, करता यीशु मेरा आलिंगन ।(२)