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ये जीवन है क्या, तेरे बिना मसीहा
मार्ग ढूंढता हूँ, जिसमे की तू चला है
पहले मान में सच्चा
फिर मेरे दिल में ज़्यादा
अर्पण में करता तुझ को.
जीवन मेरे वो मसी हा
2 अब दिल की चाहा यही है
तुझ में ही डूबा रहूँ में
मिलता रहे साथ तुम्हारा.
और कृपा है महान