Yeshu tumhe jeevan mein shanti

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यीशु तुम्हें जीवन में शान्ति देता है, (2) फिर तुम क्यों जीवन में अशांत रहते हो 1 जीवन के अंधिायारे में ज्योति देता है, (2) फिर तुम क्यों जीवन में निराश रहते हो 2 जीवन की निराशा में आशा देता है, (2) फिर तुम क्यों जीवन में निराश रहते हो 3 जीवन के राहों में क्यों भटकते हो, फिर तुम क्यों जीवन में भटकते रहते हो 4 जीवन के दुख से तुम क्यों भटकते हो, फिर तुम क्यों जीवन में भटकते रहते हो