Anugrah se bara prabhu - Krupayerum karthavilen

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अनुग्रह से बरा प्रभु में बरोसा वही है मेरे दिल का ही दिलासा क्लेशों से बरा जीवन का यात्रा अनुग्रह से कितना मनोहर अनुग्रह ही है मेरा आसरा हल्लेलुजाह अनुग्रह ही है मेरा आनंद सदा घोर वायरी आए प्रतिकूल बी होवे अनुग्रह ही काफी मुझे मेरे कष्टों के समय मुझे याद किया घोर शत्रु का सर को वो कुचल दिया उसके हाथों में मुझे थाम लिया हल्लेलुजाह गीत गावूं में व्याकुलता अधिक जीवन में आए थो बी मेरे पक्ष में है वहा बी सदा अपना जीवन मुझे दिया प्रभु तू ही अनुग्रह से ले चलाएगा मेरे बलहिंथा में वो बल देता मरुस्थल में वो आनंद का छाया बनता अंधेरे के थरायी में शरण देता अनुग्रह ही आसरा मेरा