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शांत साहिल है समीप, मेरे प्रिय येशु है करीब ।(२)
दूर नहीं, दूर नहीं, यात्रा दूर नहीं।
आंधी तूफ़ान और लहरें, कस्ती पर मारे, ज़ोर अनेक ।(२)
क्रूस को देखकर, यात्रा करूँ, शाश्वत गेह में, पहुँचू जब ।(२)
अपने सगे, साथ छोड़ दे, बंधु मित्र, बदल जावे ।(२)
येशु मेरा साथ न छोड़े, क्लेशों मैं, वोः थामेगा हाथ ।(२)