अम्बर भी नया, धरती भी नई

हिन्दी

अम्बर भी नया, धरती भी नई और नया येरूशलेम होगा हर सुबह नई हर शाम नई हर वक़्त सुहाना होगा सुन्दर सा नगर एक होगा - २ अंधे की आँख खुलेगी, बहरे का कान खुलेगा - २ दौडेगा जोर से लंगडा, गूंगा महिमा गाएगा कोई कष्ट नहीं, आंसू भी नहीं बस प्यार हे प्यार होगा - हर सबह नई सूरज न डूबेगा, चाँद भी न सोयेगा - २ कभी अँधेरा न होगा, और पाप का नाम न होगा वहा मौत नहीं बीमारी नहीं कभी किसी का अंत न होगा - हर सुबह नई ईश्वर ने इस दुनियाँ से, कितना प्रेम किया है इंसान को मुक्ति दिलाने, अपना इक पुत्र दिया है उस पर जो कोई विश्वास करे, वो उसी नगर का होगा हर सुबह नई ..