को. कलवरी पर यीशु मुआ (२) वहाँ जीवन का सोता निकाला

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को. कलवरी पर यीशु मुआ (२) वहाँ जीवन का सोता निकाला पापी प्यास तू अपनी बुझा – (२) १. उसके पंजर में भाला छिदा उसके हाथों में कीले ठुखे उसने क्या क्या दुःख न सहा । (२) कलवरी.. । २. उसके लहू से ले तू नहा साफ होंगे तेरे गुनाह वह सब के लिए है मुआ । (२) कलवरी.. । ३. हे पापीयों तुम भी पीओ, हे धर्मियों तुम भी पीओ वह सब क लिए है मुआ । (२) कलवरी.. ॥