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बस जाओ तुम मन्दिर मेरे
बस जाओ तुम मन्दिर मेरे
अंतर्यामी प्रभु
ओ अंतर्यामी प्रभु
प्यासा मन ये तुझे पुकारे
अपना लो अपना लो
वाणी मेरी नहीं निकलती
तुम बोलो तुम बोलो
साँझ सवेरा तूने बनाया
दुनियाँ में दुनियाँ में
कैसी सुन्दर रचना तेरी
सृजनहार सृजनहार
आस लगाऐ तरस रहा हूँ दर्शन दो दर्शन दो
आशा होगी कब यह पूरी बतलाओ बतलाओ