कैसे पहुचे हम

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कैसे पहुचे हम क्या कोई राह है? पाप मे डूबे खुदा तो पाक है इस गुलामी से, कौन है जो हमे आज़ाद करे? ये दिल है उसकी तलाश मे सामर्थ है तेरे लहू मे पापो को मिटा सके बंधनो से छुड़ाकर कर दे नया रात छाई है साया मौत का द्वार कर लो बाँध फसह पर्व है मृत्यु दंड से, क्या है जिसेसे हमे बक्श मिले? इस घर को उसकी तलाश है सामर्थ है....