आए खुदवंद, तूने मुझको,

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आए खुदवंद, तूने मुझको, जाँच लिया, परख लिया, मेरा उठना, बैठना, मेरे ख़याल डोर से, जान लेता है मेरे रास्ते और मेरी ख्वबगाह, पता है तुझे हर रविश से मेरी, वाकिफ़ है खुदा मेरी ज़ुबान पे हर एक बात को तू, जानता है, हाथ अपना तूने मेरे, आगे और पीछे रखा है, मैं तेरे रूह से, बचकर के कहाँ जाऊँगा, तेरी आँखों से भला, कैसे मैं, छुप जाऊँगा, तू आसमान का खुदा है, तू समंदर में बसा है, मेरा उठना, बैठना..... अगर कहूँ के अंधेरा. मुझे छुपा लेगा, तेरी नज़र में उजाला, अंधेरा यकसां है, मेरे दिल को बननेवाला, खुदा, है तू ही, पेट में मा के मुझे, तूने मेरी सूरत दी, अजीब तौर से मैं बना, हैरत अंगेज़, तेरे काम मेरा उठना, बैठना..... आए खुदा तेरे ख़याल, मेरे लिए, कितने हैं, अगर गिनू तो रेत से, भी कहीं ज़्यादा हैं, जाग उठते ही तुझे, पास मेरे पाता हूँ, देख मैं तेरे दुश्मनों से, दूर रहता हूँ, मुझे आज़मा, राह पे चला, हर बदी से, मुझको बचा मेरा उठना, बैठना.....