लकड़ी पे लटका नासरी

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लकड़ी पे लटका नासरी देने को ज़िन्दगी वो ही बना था लानती देने को रास्ती हाल्लेलुयाह।..... तेरे लहू से धुलने वाला रुतबा तेरा जाने तेरे कलाम को पढ़ने वाला ज़ात तेरी पहचाने कदमो से तेरे जो भी लिपटे ताज़ा मन वो ही खाये परस्तिश की माला जपने वाला भरपूर जीवन पाए पर्दा फटा फटी कब्र मौत पे फतह पायी कुर्बान हो के तू ने येसु मेरी जान बचायी