मुझको चुन अपना डेरा

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मुझको चुन अपना डेरा चल फिरता दिल में मेरे बालक समान अपना लिया बात करता दिल से मेरे को- अब्बा हे पिता तुझ को गाऊंगा जीवन भर तुझे ऊचा उठाऊंगा १. धर्म और अधर्म का क्या है अब नाता ज्योनत और अंधेरे में क्या है एकता छोड़ दिया अलग हुआ, अपवित्र को न छुऊंगा | २. जग के चालों से मुझे कोई नाता नही, शैतान के कायों से मुझे कोई मेल नही | ३. तूने शुद्ध किया, प्राण और आत्मा को, प्रभु के भय से मैँ पवित्र करूूँ उसको |