मुश्किल में पड़ी थी जान मेरी

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मुश्किल में पड़ी थी जान मेरी तूने इस क़दर बचा लिया कोई खड़ा न आखिर तक वहां कुछ ऐसा लफ्ज़ सुना दिया तेरी हम्द करूँ -3 ऐ जलाली खुदा तेरी हम्द करूँ -3 ऐ मेरे बादशाह साँस भी बोझ थी, जिंदा रहना सज़ा -2 हर नज़र में था मेरा, किरदार गिरा -2 जिन्हें समझा था अपना, वो छोड़ गए -2 मैं खड़ी थी अकेली, अनेकों के बीच -2 उसने फ़िदिया दिया, दी नई ज़िन्दगी मेरा रहबर बना, गुलज़ार मैं हुई तेरी हम्द करूँ… आब-ए-चश्म की नदी, सज़ा बन के बही लबों पे थी शुक्रगुजारी, जो ख़ामोशी से कही अब न फ़रियाद, न कोई बंदिश रही इश्क़-ए-मसीह में, मेरी रूह बह चली तूने बख्श दिया, हर सुरह-ए-ख़ता -2 बिन कहे सुन ली, मेरे दिल की दास्ताँ -2 मेरा गुज़रा हुआ, कल न पूछा तूने -2 मुझको प्यार दिया, भरा बाहों में -2 यीशु ने कहा, माफ़ तेरे गुनाह अब मिल ही गई, मेरी रूह को शिफ़ा तेरी हम्द करूँ… क़ुद्दूस, क़ुद्दूस, जलाली खुदा, क़ुद्दूस, क़ुद्दूस, सदा सर्वदा -4 तेरी हम्द करूँ…