पीली शाखें, सूखे पत्ते,

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पीली शाखें, सूखे पत्ते, ख़ुश-रंग शज़र बन जाते हैं जब उसकी इनायत होती है, हर ऐब हुनर बन जाते हैं और मैं जिसकी तलाश में निकला -2 उसको तो मैंने ढूंढ लिया, मगर, उसे ढूंढ कर, मैं खुद खो गया मुझे यीशु मसीह से इश्क हो गया इश्क हो गया, इश्क हो गया हमारे ईसा का, दुनियां में बोलबाला है -2 निराला नाम है, निराला नाम है और काम भी निराला है निराला नाम है, और काम भी निराला है -3 बताई आपने, सब को भलाई की बातें -2 बताई आपने, बताई आपने, सबको भलाई की बातें -3 हमेशा गिरते हुए, हमेशा गिरते हुए शख्स को संभाला है हमेशा गिरते हुए, शख्स को संभाला है -2 भटकने वालों को, वो सीधी राह दिखलाये -4 भटकने वालों को, भटकने वालों को, वो सीधी राह दिखलाये -2 परेशाँ-हाल के, परेशाँ-हाल के, सर से ग़मों को टाला है -2 हमारे ईसा का... एक रोज़ का है ज़िक्र सुनो लोगो ध्यान से -2 हैकल में आप बैठे थे, इक आनबान से -2 तालीम दे रहे थे, वो लोगों को जिस घड़ी -2 आए फ़क़ीर, और फ़रोशी भी उस घड़ी -2 औरत भी उनके साथ में, एक ख़ूब-रू थी -3 पकड़ी गई थी देखो, जिना बेकराँ ही -2 और ईसा से, और ईसा से, फ़क़ीर, फ़रोशी ने फिर कहा -3 मुज़रिम जिना की है ये, सज़ा इसकी तू बता -3 मूसा का हुक्म देखिये, तौरेत में ये है -3 बस ऐसी औरतों को तो, संगसार कीजिये -3 ये सुनके आप लिखने लगे, कुछ ज़मीन पर -3 करते रहे फ़क़ीर, फ़रोशी सवाल इधर -3 कुछ देर बाद, कुछ देर बाद, आपने उन लोगों से कहा -3 जो बेगुनाह तुम में हो, पत्थर वो मारना -3 ये गुनाहगार है, ये गुनाहगार है, संगसार करो, इसको मगर -2 पहला पत्थर वही मारे, जो गुनाहगार न हो -2 ये सुनके सारे लोग, वहां से चले गए -2 औरत और ईसा दोनों वहां, सिर्फ़ रह गए -3 औरत से फिर ये आपने फ़रमाया, जा मगर -2 करना न अब गुनाह कभी, देख उम्र भर -2 तो भटकने वालों को, भटकने वालों को, वो सीधी राह दिखाए परेशाँ-हाल के, परेशाँ-हाल के, सर से ग़मों को टाला है -2 हमारे ईसा का, दुनियां में बोलबाला है -3 निराला नाम है, निराला नाम है और काम भी निराला है निराला नाम है, और काम भी निराला है -3 हर एक ज़िन्दगी, हर एक ज़िन्दगी, पायेगी रौशनी -3 मेरा मसीहा, मेरा मसीहा, मेरा मसीहा, ज़माने में आने वाला है -3 हमारे ईसा का...