आ... या मसीहा, या मसीहा

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आ... या मसीहा, या मसीहा टुकड़ों पे उनकी पलता है ये सारा ज़माना हमसे तो एक बच्चा भी पाला न जाएगा दुनियां से हो परेशां तेरे दर पे आज आया तुम्हीं जहां के मालिक तुमसे ही दिल लगाया या मसीहा निगाह-ए-करम हों -2 गम के बादल मेरे सर पे छाए -4 तूने लाखों की झोली भरी है -2 मैं भी आया हूँ दामन फैलाए -3 जन्म से ले के, अब तक ऐ यीशु ज़िन्दगी की, हर एक खामियों में -2 जो तरस खाए, मुझ पर हमेशा -2 और कोई न तेरे सिवाए -3 है अज़ब ये, ज़माने की राहें हर कदम पर, निकलती हैं आहें -2 वैसे ही चलना मुझको, सिखा दे -2 जैसे लंगड़े थे तूने चलाए -3 दोस्त और यार, भाई-बहन सब सब सगे थे, जब तक था मतलब -2 जिन पे मैंने लुटाया हमेशा -2 वो मुझसे हैं नज़रे चुराए -3 अपनी बातों में, कामों में अक्सर मैं बना ही रहा, एक अफ़सर -2 माफ़ उनसे भी मुझको करा दे -2 जिनके मैंने कभी दिल दुखाए -3 एक बीमार, लाचार बनकर तेरे सज़दे में सर को है रखकर -2 अपनी चंगाई के वास्ते मैं -2 माँगता हूँ तुझी से दुआएँ -3 दिल परेशान, आँखें हैं वीरान रूह है बेचैन, मन मेरा हैरान -2 आँसुओं पे तरस खाने वाले -2 मेरी आँखें भी आँसू बहाए -3