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ये तन मन धन मेरा
मेरे प्रभु यीशु के लिए
अब मैं जीवित नहीं
वो मुझमें जीवित है -2
यीशु तुझे अर्पण करूँ
सब कुछ मेरा अर्पण करूँ -2
ग्रहण कर, स्वीकार कर
मन में मेरे, हो तेरा घर -2
हे अब्बा तू चाहता है ये
संगी हैं जितने मेरे
सदा ही तुझमें रहें
तेरे चरणों से लिपटे रहें -2
यीशु तुझे अर्पण करूँ…
करतार के हाथ में
मैं मिट्टी के मानिंद हूँ
मुझे आकार दे दो प्रभु
मैं तुझको समर्पित रहूँ -2
यीशु तुझे अर्पण करूँ…