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दुःख सहने, से पहले मैं,
इस शाम को मनाऊँ -2
थी आरज़ू ये मेरी,
कि फसह मैं, आज खाऊँ
दुःख सहने, से पहले मैं,
इस शाम को मनाऊँ
फिर न कभी पीऊंगा,
मैं अंगूर का ये शिरा
अपने दिलों में रखना,
मेरी याद का ज़खीरा
कल जो, भी है होना,
वो आज मैं बताऊँ
दुःख सहने, से पहले मैं,
इस शाम को मनाऊँ
मेरे खून और बदन को,
आपस में मिल के खाना
मेरे खून का ये वादा,
तुम दिल से न भुलाना
ऐसा ही, करते रहना,
जब तक न, फिर मैं आऊँ
दुःख सहने, से पहले मैं,
इस शाम को मनाऊँ
तुम में से एक मुझको,
धोखा ज़रूर देगा
गैरों से राज़ मेरा,
वो मोल जा के लेगा
ये ज़रूर ही था होना,
कि सलीब मैं उठाऊँ
दुःख सहने, से पहले मैं,
इस शाम को मनाऊँ...