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तेरे दिल के द्वार पर
येशु खटखटाता
खोलो तुम दरवाज़ा
वो है आना चाहता
बनना चाहता है वो
तेरा ही मेहमान आज
तेरा रंजो-ग़म सब
वो उठाना चाहता
ख़ुशी अपनी देता
होवे तू जلالी
रात-दिन तेरे साथ ही
वो है रहना चाहता
खोलता हूँ दरवाज़ा
दिल का ऐ मसीहा
आ और इसमें रह तू
मैं हूँ दिल से चाहता
येशु प्यारो कहता
कीमती वक़्त है जाता
वक़्त गया जो प्यारो
वापस फिर न आता