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धन्यवाद सदा प्रभु ख्रीष्ट तुझे
तेरे सन्मुख शीश नवाते हैं
हम तेरी आराधना करने को
दरबार में तेरे आते हैं ।
1 धन्य वीरों का इस मंडली में
तेरे नाम पर जो बलिदान हुए
हम उनके साहस त्याग को ले (2)
नित आगे बढ़ते जाते हैं
धन्यवाद सदा...
2. अपराध क्षमा कर दयानिधि
बल पौरूष दे अगुवाई कर
फिर अपने तन मन जीवन को (2)
वेदी पर आज चढ़ाते हैं
धन्यवाद सदा...
3. जिस क्रूस पे तेरा रक्त बहा
संसार के पापी जन के लिए
उस क्रूस ध्वजा से प्रेम तेरा (2)
हम दुनियां में फैलाते हैं
धन्यवाद सदा...