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दूंदकर आया मुझ जैसा पापी को पापी को प्रभुजी (२)
इतना अनोखा प्रेम जताने ( २)
वर्णन से बी अपार प्रभुजी
इस धरती पर तक न जावू ऐसा संबल प्रभुजी
अपने चिद्रिथ हाथों से तू मुझपर
प्रेम जता अनुग्रह सदा उंडेला
कड़ाकर्ना कलंक के बिना कलंकरहित येशुजी
सागर किनारे बैठकर जपु
मधुर गीत गाकर बजूंगा प्रभुजी
मेमने के संग साथ चले हुए गायेंगे आनंद गीत
सियोन पर्वत पर असीम आनंद है
कभी में पोचकर पाऊं इस सौभाग्य
पोषण करना दुधरूपी सत्य वचन से तू मुझे
निर्मल जल पिलाकर सर्वदा मुझे
हरी चारियों में लेजाता है मुझको