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दुनिया की भीड में क्यूँ खो रहा
मिलेगा कुछ भी न फल, जो बो रहा
तू आजा घर लौट आ .....
आ बेटे घर लौट आ
1. मैं ढूँढू उस भेड को, जो खो गई
गुनाहो के जेल में बन्द हो गई
2. गुनाह में था अबतलक तू जो धसा
मकडी की जाल में था जो फॅंसा
3. तू ऑंखे अब खोलकर, सब जॉंच ले
तू सच और झूठ को अब माप ले