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गतसमनी का बाग़
मैं ना भूलूंगा
दे दी उसने जान
पुरे कियें अरमान
गतसमनी का बाग़...
मन व्याकुल हुआ दिल टूट गया
बन के लहूँ सा पसीना बहा
गतसमनी का बाग़...
चेले सो रहे थे वो जाग रहा था
सब थे साथ मगर वो था अकेला
गतसमनी का बाग़...
अपनों ने दिया उसे धोखा वहाँ
होठो पे था प्यार क्षमा का उपहार
गतसमनी का बाग़...