Jeevan ki khoj me nikla

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जीवन की ख़ोज में निकला रे … (4) यीशु पाया, यीशु पाया … (2) मार्ग पाया सत्य पाया जीवन पाया रे … (4) ओ साथी रे, ओ साथी रे ओ बंधु रे, ओ बंधु रे इस दुनियाँ में घोर अंधेरा शैतान ने है डाला घेरा ... (2) सबके मन को उसने घेरा … (2) निकला उजियाले की खोज में … (3) यीशु पाया… मन के अंदर पाप की नगरी भरती जायें कर्म मी गगरी ... (2) कौन निकाले भवसागर से मेरी प्यासी अँखियाँ तरसे निकला छुटकारे की खोज में … (3) यीशु पाया