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जो क्रूस पे कुर्बान है,
वो मेरा मसीह है
हर ज़ख़्म जो उसका है
वो मेरे गुनाह का है … (2)
देने को मुझे जीवन,
खुद मौत सही उसने … (2)
क्या खूब है क़ुर्बानी
क्या प्यार अनोखा है … (2)
जो क्रूस पे कुर्बान है…
इंसान है वो कामिल
और सच्चा खुदा वो है … (2)
वो प्यार का दरिया है
सच्चाई का रस्ता है … (2)
जो क्रूस पे कुर्बान है…
इस दुनिया में ले आये
मेरे ही गुनाह उसको .. (2)
ये ज़ुल्म और सितम उसपर
मैंने ही कराये है … (2)
जो क्रूस पे कुर्बान है…