Jyoti se yeshu ki dur hai

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ज्योति से यीशु की दूर है अंधियारी, फूल उठी मन में प्रेम की फुलवारी । तन - मन तू सब धन तू, मालिक तू जीवन है तू -2 जल - थल में बादल में , शक्ति तेरी गर्जन है तू , कण - कण में दीख पडी छवि तेरी न्यारी । मार सही क्रूस चढ़ा , रक्त बहा कुछ न कहा , कृपा तेरी मुक्ति मेरी , तेरा वचन साथ रहा , पापिन से प्रभु जी , प्रीति तेरी न्यारी । शब्द तेरा गूंज उठा , जाग उठी तेरी लगन , सप्त - सुमन प्यार की धुन , झूम उठा सारा गगन बन्धन में डूब गई , यह दुनिया सारी ।