Kalvari krus par dektha - kalvari krushil kanum

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कलवरी क्रूस पर देखता प्रेम की संपूर्णता मुझ जैसा शत्रु को मित्र बनाया लहू बहाकर येशु उदार किया मेरा इस प्रेमी प्रभु मेरा आत्मा का मित्र chorus दुख में अश्वसक वो बीमारी में चंगाई घोर विपथियों में वो मेरे संग अपने हथेलियोंसे बाहों में लेता है इस प्रेमी प्रभु मेरा आत्मा का मित्र कबी बी ना छोड़ेगा कबी ना थ्यागेगा दर से छुड़ाकर मेरे संग रहता सदा आग से यदि तू जाए जला ना पायेगा पानी के लहरे तुझे डुबा ना पाए अग्नि का बादल सदा विराजमान रहता है सेनावों का यहोवा संग रहता मेरा युद्ध है परमेश्वर का स्मरण करो सदा प्रेम के श्रेष्ठता में आनंदित होजाये