Kalvari par yeshu muaa

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कैलवरी पर यीशु मुआ(२) वहां जीवन का सोता बहा(२) पापी प्यास तू अपनी बुझा(२) कैलवरी पर... 1 ऐ धर्मियों तुम भी पियों, ऐ पापियों तुम भी पियों (२) वह सबके लिए है बहा, कैलवरी पर(२) 2 उसकी पसली में भाला छिदा , उसके हाथों में कीलें ठुकी उसने क्या - क्या दुःख है सहा, कैलवरी पर 3 उसके लोहू में ले तू नहा, माफ होगें तेरे सब गुनाह उसकी बख्शिष है सबके लिए, कैलवरी पर 4 वह सूली पर है चढ़ गया, कहा उसने की पूरा हुआ द्वार मुक्ति का खोला गया, कैलवरी पर 5 जो विश्वास उस पर करे, जीवन अनन्त उसे मिलेगा अब समय तुम नष्ट न करो कैलवरी पर 6 अब अगर विश्वास न करे, रास्ता है नरक का अब खुला रोना, दाँतो का पीसना होगा, कैलवरी पर