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कैलवरी पर यीशु मुआ(२)
वहां जीवन का सोता बहा(२)
पापी प्यास तू अपनी बुझा(२)
कैलवरी पर...
1 ऐ धर्मियों तुम भी पियों, ऐ पापियों तुम भी पियों (२)
वह सबके लिए है बहा, कैलवरी पर(२)
2 उसकी पसली में भाला छिदा , उसके हाथों में कीलें ठुकी
उसने क्या - क्या दुःख है सहा, कैलवरी पर
3 उसके लोहू में ले तू नहा, माफ होगें तेरे सब गुनाह
उसकी बख्शिष है सबके लिए, कैलवरी पर
4 वह सूली पर है चढ़ गया, कहा उसने की पूरा हुआ
द्वार मुक्ति का खोला गया, कैलवरी पर
5 जो विश्वास उस पर करे, जीवन अनन्त उसे मिलेगा
अब समय तुम नष्ट न करो कैलवरी पर
6 अब अगर विश्वास न करे, रास्ता है नरक का अब खुला
रोना, दाँतो का पीसना होगा, कैलवरी पर