Karle kabza aye paak rooh

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सोचों पे कब्ज़ा ख़लाओं पे कब्ज़ा सासों पे कब्ज़ा बातों पे कब्ज़ा करले कब्ज़ा ऐ पाक रूह करले कब्ज़ा ऐ पाक रूह मालिक तू ही हर दम का है मरहम तू ही हर गम का है हर दम पे कब्ज़ा हर गम पे कब्ज़ा जब भी अपना मुँह मैं खोलूं हिकमत के ही जुम्ले बोलूं मेरे मुँह पे कब्ज़ा मेरी रूह पे कब्ज़ा तुझमें ही हर काम करूँ मैं जीवन तेरे नाम करूँ मैं काम पे कब्ज़ा नाम पे कब्ज़ा राहें तुझसे जुड़ती रहे अब हिकमत तुझसे मिलती रहे अब राहों पे कब्ज़ा हिकमत पे कब्ज़ा