Kitana Madhuratm Hai Prabhu

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कितना मधुरतम है प्रभु तेरे आँगन में वास करना कितना मधुरतम है ... (2) सेनाओ के यहोवा तेरा निवासस्थान क्या ही प्रिय है ... (2) कितना मधुरतम है... परमेश्व का मैं मंदिर हूँ और इसलियें आनंदित हूँ ... (2) स्तुतिरूपी बलिदान मसीहा के द्वारा निरंतर चढ़ाता रहूँ ... (2) कितना मधुरतम है... आँगन में तेरे वास करना मैं निरंतर चाहता रहूँ ... (2) तन मन धन से मैं परमेश्वर को निरंतर पुकारता रहूँ ... (2) कितना मधुरतम है...