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कितना हसीन वादा ये, किया खुदावंत ने ... (2)
जहा दो या तीन जमा हो, मैं हूँ हाज़िर उनमे... (2)
कितना हसीन वादा ...
तुझे अकेला ना छोडू मैं रूह अपनी भेजू ... (2)
तुझे अनाथ भी ना छोडू एक मददगार भेजू ... (2)
यीशु के सिवा ये कब है बात कही किसने … (2)
जहा दो या तीन जमा हो, मैं हूँ हाज़िर उनमे... (2)
दस्तक वो देता है चाहे हर दिल में आना ... (2)
भरता उसको रूह से अपनी जिसने उसे जाना ... (2)
जिसका बने है माली वो कलियाँ लगे खिलने ... (2)
जहा दो या तीन जमा हो, मैं हूँ हाज़िर उनमे...(2)
रूह-ए-पाक जो हाज़िर है और रहे खुशामदिद ... (2)
इज़्ज़त दौलत हश्मत जिसकी उसकी करे तम्दिल ... (2)
रूह के शोले बरसे जब फिर बदन लगे जलने … (2)
जहा दो या तीन जमा हो, मैं हूँ हाज़िर उनमे... (2)