Krus ke paas tu muje

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क्रूस के पास तू मुझे रख, यीशु प्यारे त्राता पापी वहाँ सोते से, सेंत में मुक्ति पाता को: क्रूस की मैं, क्रूस की मैं नित बड़ाई करूँगा जब तक मैं आनंदित हो पार न पहुँचूंगा २. क्रूस के पास जब मैं आया, प्रेम और कृपा पाई वहां किरण सूर्य की , मेरे दिल में आई;- ३. तेरी दया क्रूस के पास मुझे पहुँचावे मेरे ऊपर सदा लों क्रूस की छाया आवे;- ४. क्रूस के पास में ठहरूँगा नित भरोसा रख के जब तक मैं न देखूंगा, हर्ष को तेरे घर के;-