Lahoo ke bagar na shifa na

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लहू के बगेर न शिफा न नजात है तौबा के साथ ये तो मुफ्त सौगात है लहू के बगेर... 1.एक तू ही बचेगा बचेगा कुल घराना लहू की कुदरत को तूने न पहचाना वायदों का सच्चा और सच्चा उसकी जात है तौबा के साथ ये तो मुफ्त सौगात है लहू के बगेर ... 2. एक ही बार उसने लहू को बहाया बन्धनों को तोड़ के तो बाप से मिलाया हुआ अब सबेरा ख़तम हुई रात है तौबा के साथ ये तो मुफ्त सौगात है लहू के बगेर ... 3.प्यारे तू क्यों सोचे,खुदावंत तुझसे दूर है मुक्ति फज़ल से मिले उसके हजूर है इमान जो लाए , खुदावंद उसके साथ है तौबा के साथ ये तो मुफ्त सौगात है लहू के बगेर...