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महिमा से बरा है शहर
देखता हूं दूर पर विश्वास से
अनंत घर रचा है प्रभु ने
बाट जोथा है हमारे लिए
जल्दी हम जाएंगे
महिमा से बरा किनारा (२)
हम उस महिमा के घर गाए
उधार पाए हूवों का संगीत
दुख और रुदन नहीं है वहा
अनंत सौभाग्य अथमावों को
प्रेमी स्वर्गीय पिता देता
प्रेम से बरा है बेट प्रतिदिन
देता हमको बिना रुकावट
दृष्टि से हम स्तुति गीत गाएं