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मैं अपनी आंखें उठाता हूं प्रभु
कलवरी के उस क्रूस की ओर (2)
मेरे लिए कुचला गया
मेरे लिए जिसने जान दी (2)
तेरे चरणों को प्रेम से चूमने
तेरे ही पास आता हूं (2)
आराधना यिशु की हो (2)
हालेलुया हालेलुया (2)
1) मरूभूमि के इस सफर में प्रभु
अगुवाई देकर तू चला मुझको
मेरे पैरों को तू स्थिर कर दे
अपनी दया से मुझे थाम ले प्रभु
जंगली जैतून सा था मैं तूने
अपने साथ जोड़ा मुझको
जितना धन्य कहूं वो भी, कम है प्रभु
जितनी स्तुति करूं वो भी, कम है प्रभु;
तेरे प्रेम को जब याद करूं
तेरी कृपा को जब याद करूं (2)
मैं कुछ भी नहीं ,मुझमें कुछ भी नहीं
सब तेरी दया है प्रभु;- आराधना…
2 कुम्हार के हाथों में मिटटी हो जैसे
तेरी इच्छा मुझमें पूरी हो जाए
संसार में तेरी सेवा करने को
करता समर्पण यह जीवन अपना
टूटे हुए मन को मेरे
अपनी महिमा से भर दिया
जितना धन्य कहूं वो भी, कम है प्रभु
जितनी स्तुति करूं वो भी, कम है प्रभु
तेरे प्रेम को जब याद करूं
तेरी कृपा को जब याद करूं (2)
मैं करता हूं अर्पण सबकुछ अपना
तेरे ही महिमा के लिए;- आराधना…