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मसीह मेरा इनाम संपूर्ण भक्ति मेरी
और कुछ भी नही जगत में जो दे सके संतोष
हर संकट में मेरी आत्मा गायें
ना लौटूँगा आज़ादी है मिली
मसीह मुझे तू काफ़ी है ... (2)
मेरी हर ज़रूरत तुझमें है
मेरी हर ज़रूरत तू
मसीह मेरा सबकुछ उद्धार का आनंद
और ये आशा नहीं निराशा स्वर्ग है मेरा घर
हर तूफ़ा में मेरी आत्मा गायें
यीशु है यहाँ प्रभु की महिमा
मसीह मुझे तू काफ़ी है...
सोचा है चलूं यीशु के पीछे ना लौटूँगा-ना लौटूँगा ... (2)
आगे मेरे क्रूस है मेरे पीछे दुनिया ना लौटूँगा-ना लौटूँगा ... (2)
मसीह मुझे तू काफ़ी है...